
JHN DESK साहिबगंज (SAHIBGANJ) साहिबगंज जिले का कोटल पोखर इलाका इन दिनों एक बड़े माइनिंग घोटाले का गवाह बनता जा रहा है। हर दिन करीब 200 से ज्यादा ट्रकों में पत्थर की खेप क्रेशर से लोड होकर बिना किसी वैध माइनिंग चालान के सीधे पश्चिम बंगाल रवाना हो रही है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, और सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे हैं।
क्रेशर कंपनियों की मनमानी और सरकार को सीधी चपत
नियम के मुताबिक, किसी भी ट्रक में गिट्टी लोड करने से पहले माइनिंग चालान कटवाना अनिवार्य है। यह सरकार को राजस्व देने की अनिवार्य प्रक्रिया है। लेकिन बरहरवा अंचल के कई क्रेशर संचालक बेधड़क इस कानून को ताक पर रखकर बिना चालान गिट्टी लोड कर रहे हैं। सरकार को राजस्व मिले या नहीं, इन्हें फर्क नहीं पड़ता।
“चढ़ावा” देकर पार होती है हर जांच
ये ट्रक कोटल पोखर थाना क्षेत्र से निकलकर जीवनपुर और रहीमाटांड़ चेकनाका पार करते हैं। जहां एक चालान की जगह “चढ़ावा” यानी अवैध घूस देकर ट्रकों को बेरोक-टोक गुजरने दिया जाता है। कुछ ही किलोमीटर बाद ये ट्रक पश्चिम बंगाल की सीमा में दाखिल हो जाते हैं। और इस तरह हर दिन करोड़ों का खनिज बिना किसी वैध दस्तावेज के राज्य से बाहर चला जाता है।
माइनिंग सिंडिकेट का मजबूत जाल
यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सिंडिकेट का हिस्सा है जिसमें ट्रांसपोर्टर, क्रेशर मालिक, चेकनाका कर्मी और कुछ प्रभावशाली तत्व भी शामिल हैं। एक ऐसा गठजोड़, जो हर रोज राज्य सरकार को करोड़ों की चपत लगा रहा है।
सवाल उठता है कब जागेगा प्रशासन?
जब सारी जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस के पास है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह मिलीभगत का नतीजा है या फिर प्रभावशाली माफिया तंत्र का दबाव?
अगर नहीं लगी लगाम…
अगर समय रहते इस अवैध परिवहन पर लगाम नहीं लगी, तो न सिर्फ राज्य को भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि सरकारी तंत्र की साख भी गंभीर रूप से प्रभावित होगी। यह वक्त है कि शासन-प्रशासन जागे और इस माफिया सिंडिकेट पर सख्त कार्रवाई करे।
Author: Jharkhand Nama
News portal





