‘राजनीति ने बहुत कुछ सिखाया’: अजहर इस्लाम का दर्द, सबक और उम्मीद भरा संदेश
पाकुड़ की सियासत में अपनों की ‘उलटी चाल’ पर छलका पूर्व प्रत्याशी का दर्द, बोले — अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक

झारखंड नामा ब्यूरो पाकुड़, — राजनीति के मैदान में उतरना जितना रोमांचक होता है, उससे कहीं ज्यादा कठिन होता है यहां टिके रहना। कुछ ऐसी ही टीस और अनुभव से भरी बात पाकुड़ विधानसभा के पूर्व एनडीए प्रत्याशी सह समाजसेवी अजहर इस्लाम के हालिया बयान में झलकी। उन्होंने एक भावुक टिप्पणी में कहा, “एक युवा जब पाकुड़ की राजनीति में अपना पैर जमाया तो इनके प्यादे भी उलटी चाल में अपनों जैसा हितैषी बने। आखिर राजनीति ने बहुत कुछ सिखाया।”
गम: अपनों से मिला धोखा
अजहर इस्लाम का यह बयान पाकुड़ की सियासी जमीन पर पनपे विश्वासघात की ओर इशारा करता है। राजनीति में कदम रखने के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उनके शब्दों में एक गहरा गम है। जिन लोगों को उन्होंने अपना समझा, जिन ‘प्यादों’ पर भरोसा कर आगे बढ़े, वक्त आने पर वही ‘उलटी चाल’ चलते नजर आए। यह दर्द सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर उस युवा का है जो साफ नीयत से राजनीति में आता है और ‘अपनों’ की साजिशों का शिकार होता है।
मायूसी: टूटे भरोसे की कहानी
बयान में एक मायूसी भी है — सिस्टम और लोगों से मिली उस निराशा की, जो अक्सर ईमानदार कोशिशों के बाद हाथ लगती है। अजहर इस्लाम के शब्द बताते हैं कि राजनीति में सिर्फ विरोधी ही नहीं, कई बार अपने ही लोग सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं। हितैषी का मुखौटा पहनकर पीठ में छुरा घोंपने वाली सियासत ने उन्हें झकझोरा जरूर, लेकिन तोड़ा नहीं।
प्रसन्नता: अनुभव से मिली परिपक्वता
मगर इस गम और मायूसी के बीच एक प्रसन्नता भी है — सीखने की, मजबूत होने की। “आखिर राजनीति ने बहुत कुछ सिखाया” — यह वाक्य हार का नहीं, बल्कि एक योद्धा के और परिपक्व होने का प्रमाण है। अजहर इस्लाम मानते हैं कि इन अनुभवों ने उन्हें जनता की नब्ज, सियासी दांव-पेंच और रिश्तों की हकीकत समझाई है। यह प्रसन्नता उस आत्मविश्वास की है जो धोखे खाने के बाद भी सेवा का रास्ता नहीं छोड़ता।
आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजहर इस्लाम का यह बयान केवल निजी अनुभव नहीं, बल्कि पाकुड़ की बदलती राजनीतिक संस्कृति पर एक टिप्पणी है। जहां युवा जोश के साथ आते हैं, लेकिन ‘अपनों’ की चालबाजियों से उनका सामना होता है।
अजहर इस्लाम ने अपने बयान के अंत में भले कुछ न कहा हो, लेकिन उनका संदेश साफ है — राजनीति में गम मिलेगा, मायूसी होगी, पर जो इनसे सीखकर आगे बढ़ेगा, उसी के हिस्से में असली प्रसन्नता आएगी।
Author: Jharkhand Nama
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