चेकपोस्ट पर लगी माफिया की अदालत खाकी बनी मुंशी, और नियम बने मज़ाक का पात्र!

JHN DESK साहिबगंज (SAHIBGANJ) यहाँ बात कानून की नहीं, कॉन्ट्रैक्ट की सेटिंग की होती है। जहाँ होना था गिट्टी पर शिकंजा, वहाँ चल रहा है सिस्टम का सिक्का और माफिया का डंका!

जी हां, हम बात कर रहे हैं कोटालपोखर थाना क्षेत्र के जीवनपुर और रहीमटांड़ चेकपोस्ट की जहाँ दिन में नियमों की लाठियाँ खड़ी रहती हैं, और रात में नियम खुद धराशायी हो जाते हैं।

रात ढले जागता है माफिया का मेला, और सो जाता है प्रशासन का पहरे वाला!

जैसे ही सूरज ढलता है, ट्रक लाइन में लगते हैं ना माइनिंग चालान, ना रोक-टोक जिसका जुगाड़ मजबूत, उसका ट्रक सबसे आगे सड़क पर ऐसी धमाचौकड़ी मचती है कि लगता है ये चेकपोस्ट नहीं, माफिया की मल्लिका-ए-दरबार हो!

प्रशासन आदेशों का ढोल, जिसकी पोल हर रात खुलती है

बैठकें होती हैं, निर्देश दिए जाते हैं पर हाल वही नाखून बड़े, पर पकड़ नहीं कभी-कभी दिखावे की छापेमारी होती है,जैसे बंदर ने आँख बंद कर ली, सोचा तूफ़ान टल गया।

माफिया चाल में नाग, अंदाज़ में राजा

माफिया को पता है किधर आँख मूंद ली जाती है और किधर जेब खुलती है। इन्हें कानून से डर नहीं,बल्कि भरोसा है कि जिसकी लाठी, उसकी भैंस। गिट्टी से लदा ट्रक निकले तो ऐसा लगे जैसे कोई बारात बिना दूल्हे के, लेकिन धूमधाम से निकल रही हो।

साहिबगंज में सब कुछ चलता है, बस ईमानदारी अटकती है!

चेकपोस्ट वही, थाना वही, नियम वही लेकिन जब नियत में खोट हो,तो हाल भी वही ऊपर से खाकी, अंदर से ढीला ढाल।

अब सवाल ये है क्या कभी ये चुप्पी टूटेगी या यूँ ही रात में माफिया का जलवा रहेगा, और कानून रजाई ओढ़ कर खर्राटे मारेगा।

Jharkhand Nama
Author: Jharkhand Nama

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