
JHN DESK SAHIBGANJ / कोटालपोखर की वो सड़कों ने फिर से धूल फांकनी शुरू कर दी है। सैकड़ों ट्रक बिना माइनिंग स्लिप, बिना चेकिंग ऐसे दौड़ रहे हैं मानो कानून इन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दे रहा हो। जीवनपुर चेकपोस्ट? रहीमटाड़ पोस्ट? अब तो ये ‘चेकपोस्ट’ नहीं, ‘पासपोस्ट’ बन गए हैं। जिस ट्रक में गिट्टी हो, वो बस हॉर्न बजाए और निकल जाए। कोई नहीं पूछेगा तू कौन? तेरी मंज़िल कहाँ
थाना प्रभारी:
इनके लिए तो ये रोज़ का तमाशा है। ट्रक निकलते हैं, धुआँ उड़ाते हैं, और साहब चुपचाप आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। ऐसे लगता है मानो “देखना मना है” की तख्ती खुद थाना परिसर पर लटकी हो।
बरहरवा के CO साहब:
पूछिए मत! शायद गूगल मैप पर कोटालपोखर अब आता ही नहीं।
वरना ऐसी बेखौफ माफियागिरी आपकी नजरों से कैसे छूट जाती?
जनता पूछती है: कितनी कीमत है एक ट्रक गिट्टी की?
और कितनी कीमत पर बिकता है इंसाफ का खामोश चेहरा?
Author: Jharkhand Nama
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