हाईकोर्ट के आदेश का अपमान HC की रोक के बाद भी सिमलोंग में बालू का परिवहन जारी

JHN DESK PAKUR: पाकुड़ जिले के सिमलोंग थाना क्षेत्र में इन दिनों हालात ऐसे हैं मानो हाईकोर्ट की रोक कागज़ों में कैद हो गई हो और ज़मीन पर बालू माफिया की बादशाहत चल रही हो। दिन के उजाले में एक नहीं, दो नहीं दर्जनों ट्रैक्टर बालू लादे ऐसे गुजरते हैं जैसे उन्हें किसी का डर ही न हो। कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं लेकिन सिमलोंग में तो कानून की आंखों पर पट्टी बंधी दिखती है। पुलिस की नाक के नीचे से बालू की गाड़ियां रेंगती नहीं, सीना ठोक कर निकलती हैं, मगर थानेदार साहब को न खनन दिखता है, न परिवहन सब कुछ मोर बनकर नाच रहा है। हाईकोर्ट ने साफ-साफ बालू खनन पर रोक लगाई है, लेकिन यहां का प्रशासन मानो कह रहा हो कोर्ट अपनी जगह, हमारा खेल अपनी जगह! नतीजा यह कि HC की रोक को ठेंगा दिखाकर इलाके में अवैध खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है।आज सिमलोंग में सवाल सिर्फ बालू का नहीं, कानून की साख का है। जब हुक्मरान खामोश हों, रखवाले बेख़बर हों और माफिया बेख़ौफ, तो समझ लीजि यहाँ नियम नहीं, रेत की रानीत चल रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है या फिर हाईकोर्ट की रोक यूं ही ट्रैक्टरों के टायरों तले कुचली जाती रहेगी।
पाकुड़ ज़िलें की इस अवैध गतिविधि को लेकर झारखंड के पूर्व और प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने X पर टिप्पणी की है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी लगातार विधानसभा से लेकर मीडिया तक यह झूठ फैलाते रहते हैं कि केंद्र सरकार ने झारखंड का पैसा रोका हुआ है। जबकि हम बार-बार कहते आए हैं कि यदि झारखंड की प्राकृतिक संपदाओं का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो इस राज्य में धन की कभी कमी नहीं होगी। लेकिन हेमंत सरकार का पूरा ध्यान वैध खनन और सरकारी राजस्व बढ़ाने पर नहीं, बल्कि अवैध खनन और उससे होने वाली काली कमाई पर टिका हुआ है।

अब तो आम ग्रामीण भी इस काले साम्राज्य के खिलाफ आवाज़ उठाने लगे हैं। इस पत्र में भी साफ लिखा है कि साहिबगंज–पाकुड़ क्षेत्र में किस तरह पत्थर का बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चल रहा है। और यह तो सिर्फ एक पत्र है—ऐसे हजारों पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय और एसीबी में धूल खा रहे हैं।
यह पूरा खेल “बाबा” के इशारों पर चलता है। इलाके में डीसी और एसपी भी मानो बाबा के निजी घरेलू स्टाफ की तरह काम करते हों। इन जिलों में वही अधिकारी भेजा जाता है जो बाबा के आगे नतमस्तक होने की कसमें खा ले। और यदि कोई युवक या आम ग्रामीण विरोध करता है, तो उस पर झूठे केस लादकर जेल भेज दिया जाता है, यहाँ तक कि एनकाउंटर भी कर दिए जाते हैं।
हेमंत जी, आखिर यह “बाबा” कौन है, जो आपके निजी एवं आवासीय अंगरक्षकों की पूरी फौज को लेकर खुलेआम इलाके का निरीक्षण करता फिरता है, अधिकारियों को निर्देश देता है।
सुना है सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध खनन मामले में जॉंच और करवाई जारी रखने के आदेश के बाद प्रशासन ने आनन-फ़ानन में भयवश आपके उन आवासीय गार्डों को “बाबा” के आवास से वापस हटा लिया है जो नाम के तो आपके लिये थे लेकिन काम “बाबा” के साथ रहकर “बाबा” के लिये ही करते थे। सीबीआई को यह ज़रूर देखना चाहिए कि मुख्यमंत्री के निजी आवास के लिये एलाटेड पुलिस की पूरी फौज किसके कहने पर वहाँ बाबा के आवास पर रहकर और बाबा के साथ घूम कर काम कर रही थी?
खैर, एक बात याद रखिएगा: जिस दिन प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी, उसी दिन ऐसे बाबा और आपके गुर्गों का आतंक चौबीस घंटे के भीतर खत्म कर दिया जाएगा। वैसे अभी उस इलाके में अवैध पत्थर खनन मामले में सीबीआई की कार्रवाई का परिणाम भी जल्दी ही सामने आने वाला है।
Author: Jharkhand Nama
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