घोटाला और घोटाला आखिर मास्टर माइंड कौन

 

फर्जी एडवाइस से करोड़ों की लूट! पाकुड़ कल्याण विभाग में 12.38 करोड़ का महाघोटाला, बैंक कर्मियों की मिलीभगत की आशंका

 

JHN PAKUR :पाकुड़: जिले के कल्याण विभाग में 12 करोड़ 38 लाख 66 हजार रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। फर्जी एडवाइस के जरिए सरकारी राशि की अवैध निकासी किए जाने का आरोप सामने आया है। इस मामले में कार्यालय अधीक्षक, कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुसेवक सहित कुल 26 लोगों के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

 

घोटाले का पर्दाफाश 8 दिसंबर को तब हुआ, जब एसबीआई बाजार शाखा के प्रबंधक अभिनव कुमार ने कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का को सूचित किया कि विभाग की ओर से प्रस्तुत किए गए एडवाइस पर किए गए हस्ताक्षर, बैंक में दर्ज हस्ताक्षर से मेल नहीं खा रहे हैं। जांच में सामने आया कि अनुसेवक अक्षय रविदास एडवाइस लेकर बैंक पहुंचा था।

 

हस्ताक्षर में गड़बड़ी की सूचना के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट और कुछ ही देर में कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र झा बैंक पहुंचे और संदिग्ध एडवाइस को अपने साथ वापस ले गए। संदेह उस वक्त और गहराया, जब अधीक्षक ने शाखा प्रबंधक को बताया कि पदाधिकारी घर जा चुके हैं, जबकि प्रबंधक उस समय लगातार फोन पर उनसे संपर्क में थे और वे कार्यालय में ही मौजूद थे।

 

सख्त पूछताछ के बाद करीब 15 घंटे बाद कंप्यूटर ऑपरेटर ने स्वीकार किया कि एडवाइस को फाड़ दिया गया है। इसके बाद कल्याण पदाधिकारी ने 1 फरवरी 2025 से अब तक के खातों का पूरा विवरण बैंक से मंगाया। कार्यालय के कर्मचारियों राकेश रंजन सोरेन, मो. तहसीन और मो. इंर्तिका द्वारा किए गए मिलान में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—कई एडवाइस के पत्रांक, तिथि और निर्गत पंजी आपस में मेल नहीं खा रहे थे, जिससे करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि हुई।

 

एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि तत्कालीन कल्याण पदाधिकारी लक्ष्मण हरिजन के कार्यकाल में भी फर्जी निकासी की आशंका है। बैंक में उपलब्ध 74 एडवाइस में से 7 एडवाइस उस अवधि के विभागीय अभिलेखों से मेल नहीं खाते। मामले को और संदिग्ध बनाता है यह तथ्य कि अक्षय रविदास को 4 दिसंबर को ही डुमरचिर विद्यालय से विरमित किया जा चुका था, इसके बावजूद वह 8 दिसंबर को विभागीय एडवाइस लेकर बैंक पहुंचा, जो एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।

 

फिलहाल कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र झा, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार, अनुसेवक अक्षय रविदास समेत 26 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस और विभागीय एजेंसियां घोटाले की परत-दर-परत जांच में जुटी हैं। यह घोटाला न केवल विभागीय लापरवाही, बल्कि बैंक स्तर पर संभावित मिलीभगत को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

कुछ सोशल मिडिया से ऐसी भी खबरें आ रही है की इस घोटाला से कई बार रेस्तरा और कई कार्यक्रम तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम मे नोटों की गड्डी उडाने वाले की भूमिका भी संदिग्ध है आखिर यह जांच और अनुसन्धान का विषय है इनके दायरे मे कितने सामाजिक कार्यकर्त्ता और धर्म के प्रचारक और प्रशासन की भूमिका क्या है

 

Jharkhand Nama
Author: Jharkhand Nama

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