अवैध खनन और मिट्टी भराई का खेल” तू लूटल बाड़े अब हमहो लुटब

पाकुड़ ज़िलें के जिन जिन खनन क्षेत्र की शिकायत दर्ज़ है उन क्षेत्रों मे सबूत को मिटाने की साजिश पर सेटेलाइट को कैसे बईमान बनाओगे

JHN PAKUR :भ्रष्टाचार की दुनिया में सब कुछ मुमकिन है, और जब बात अवैध खनन की हो, तो ये खेल और भी दिलचस्प हो जाता है। अवैध खनन का मतलब है बिना अनुमति या नियमों का उल्लंघन कर खनिज, मिट्टी, या अन्य संसाधनों को निकालना। और जब इस गंदे खेल को छुपाने के लिए मिट्टी भराई की जाती है, तो यह एक तरह से “सफाई का नाटक” बन जाता है। आइए इसे एक मजेदार अंदाज में समझते हैं!
कैसे होता है ये खेल?
पहला कदम: खनन की शुरुआत* किसी इलाके में खनिजों की भरमार है। लेकिन सरकार से अनुमति लेना? वो तो “ईमानदार” लोग करते हैं। यहां भ्रष्टाचार के खिलाड़ी आते हैं, जो अधिकारियों की जेब गरम करके खनन शुरू कर देते हैं।नन का खनन का फायदा उठाना
– खनिज निकाला जाता है, ट्रकों में लादकर बेचा जाता है, और पैसे की बारिश होती है।
– इस दौरान, आसपास के पर्यावरण का सत्यानाश कर दिया जाता है। पेड़ कट जाते हैं, जमीन खोखली हो जाती है, और पानी के स्रोत सूख जाते हैं।
भंडाफोड़ का डर:*- जब यह अवैध खनन चर्चा में आने लगता है, या कोई जांच होने की संभावना बनती है, तो खेल का दूसरा चरण शुरू होता है।
“मिट्टी भराई” का नाटक !मिट्टी भराई का ड्रामा: – खनन से हुई गहरी खाई और गड्ढों को मिट्टी से भर दिया जाता है। – ऊपर से ऐसा दिखाया जाता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं।- अधिकारी आते हैं, “सब ठीक है” की रिपोर्ट देते हैं, और अपनी मोटी फीस लेकर चले जाते हैं।
भ्रष्टाचार का ताना-बाना -अधिकारियों की मिलीभगत:- स्थानीय प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस की भूमिका इसमें सबसे अहम होती है बिना उनकी “अनदेखी” के यह संभव ही नहीं है।
अवैध खनन की मापी मे घोल माल कर उन्हें संगरक्षण देना -खनन को वैध दिखाने के लिए एक रैकेट काम करता है जो सभी जांच को अपने अनुसार बनाकर सब कुछ नियमों के अनुसार है” का दिखावा किया जाता है।
सफाई का ढोंग: मिट्टी भराई करके पर्यावरण को “सुरक्षित” दिखाने की कोशिश होती है।असल में, जमीन का प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह खत्म हो चुका होता है।परिणाम:
*पर्यावरण का नुकसान:* मिट्टी भराई से जमीन की उर्वरता खत्म हो जाती है।जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं, और आसपास की खेती बर्बाद हो जाती है।
*सरकारी राजस्व का नुकसान: अवैध खनन से सरकार को मिलने वाला टैक्स चोरी हो जाता है।इसका असर विकास योजनाओं पर पड़ता है।
जनता को धोखा: आम जनता को यह दिखाया जाता है कि सब कुछ सही है, जबकि असलियत में उनका ही हक छीना जा रहा होता है।
इस पर वर्तमान मे किया जा सकता है?जागरूकता:* स्थानीय लोग अगर सतर्क रहें और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना दें, तो इसे रोका जा सकता है।
-कड़ी कार्रवाई: ईमानदार अधिकारियों और न्यायपालिका की मदद से इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
सतत विकास:* खनन को वैध तरीके से और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार और अवैध खनन का यह खेल “ऊपर से चमकदार, अंदर से सड़ांध” जैसा है। मिट्टी भराई से गड्ढे तो भर सकते हैं, लेकिन सिस्टम के गड्ढों को भरने के लिए ईमानदारी और सख्त कानून की जरूरत है।
तो, अगली बार जब आप किसी गड्ढे को मिट्टी से भरा देखेंगे, तो समझ जाइए कि कहानी सिर्फ मिट्टी की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की भी है।
Author: Jharkhand Nama
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