साजिशों ने कहा – ना ना, षड्यंत्रकारियों ने कहा – हा हा, अच्छे कर्म ने कहा – बाजीगर घर आ जा

पूर्व एन.डी प्रत्याशी सह समाजसेवी अजहर इस्लाम के जीवन का सच
राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि जो जमीन से जुड़ा होता है, जो जनता के दुख-दर्द को अपना समझता है, उसके खिलाफ साजिशें सबसे ज्यादा होती हैं। पाकुड़ की धरती पर एक ऐसा ही नाम है अजहर इस्लाम एक पूर्व एन.डी प्रत्याशी, पर उससे बढ़कर एक समाजसेवी।
जब कोई व्यक्ति कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि कर्म के लिए राजनीति करता है, तो साजिशों का बाजार गर्म होना लाजमी है।
साजिशों ने कहा – ना ना
अजहर इस्लाम को रोकने की साजिशें नई नहीं हैं।
हर बार जब उन्होंने गरीब के हक की बात की, हर बार जब उन्होंने बेबस की आवाज उठाई, तब-तब एक ही साजिश रची गई – इसे कैसे रोका जाए
उन्हें जाति में बांधने की कोशिश हुई, जबकि उन्होंने हमेशा इंसानियत की बात की
उन्हें धर्म की दीवार में कैद करने की कोशिश हुई, जबकि उनके दरवाजे हर मजहब के लिए खुले रहे
उन्हें अकेला दिखाने की कोशिश हुई, जबकि उनके साथ हजारों युवाओं, बुजुर्गों और माताओं का आशीर्वाद चलता है।
पर साजिश करने वाले भूल गए, सच्चे आदमी को साजिश से नहीं, सिर्फ साजिश से ही ताकत मिलती है।
षड्यंत्रकारियों ने कहा – हा हा
षड्यंत्रकारी हँसे
उन्होंने सोचा – प्रचार से, अफवाह से, झूठे आरोपों से इस आदमी को खत्म कर देंगे
आजकल का सबसे आसान हथियार क्या है बदनाम करो
अजहर इस्लाम के बढ़ते जनाधार को देखकर कुछ लोगों ने यही हथियार अपनाया। बंद कमरों में मीटिंग, चाय की दुकानों पर अफवाह, सोशल मीडिया पर झूठ।
उनका हा हा दरअसल उनकी बौखलाहट थी। क्योंकि जब आप जमीन पर काम करते हो, तो आपको हराने के लिए षड्यंत्र ही आखिरी रास्ता बचता है। वे हँसे, क्योंकि उनके पास जनता के बीच जाने का कोई काम नहीं था
पर, जनता का हा हा नहीं, जनता की हाय सबसे बड़ी होती है, और जनता की वाह सबसे बड़ी जीत
अच्छे कर्म ने कहा – बाजीगर घर आ जा
और आखिर में जीत किसकी होती है अच्छे कर्म की
अजहर इस्लाम ने कभी पोस्टर से अपनी पहचान नहीं बनाई, उन्होंने अपनी पहचान बनाई है
रात के 2 बजे किसी बीमार को अस्पताल पहुँचाकर
किसी गरीब बेटी की शादी में कंधा लगाकर किसी बेरोजगार नौजवान को हौसला देकर किसी लाचार के आंसू पोंछकर यही उनके अच्छे कर्म हैं। यही उनकी असली पूंजी है। साजिशें कागज पर रची जाती हैं, षड्यंत्र जुबान पर रचे जाते हैं, पर अच्छे कर्म दिलों में लिखे जाते हैं। और दिलों में लिखा हुआ कभी मिटता नहीं।
इसलिए आज पाकुड़ की जनता कह रही है – साजिशें हार गईं, षड्यंत्र हार गए, बाजीगर जीत गया।
क्योंकि बाजीगर वो नहीं जो बाजी पलट दे, बाजीगर वो है जो बिना सत्ता के भी जनता के दिलों पर राज करे।
अजहर इस्लाम – नाम नहीं, एक भरोसा है साजिशों से बड़ा, षड्यंत्रों से ऊंचा, अच्छे कर्मों का बाजीगर।
Author: Jharkhand Nama
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