खून से लिखी कहानी _पाकुड़ उपायुक्त मनीष कुमार ने 23वीं बार किया जीवनदान, रचा मानवता का अनमोल अध्याय!

पाकुड़ से नंद किशोर मंडल की रिपोर्ट✍️

कहते हैं रक्तदान सबसे बड़ा दान है, लेकिन जब किसी जिले का शीर्ष अधिकारी खुद अपने कर्मों से इस संदेश को जीता है, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।

ऐसे ही हैं पाकुड़ के ऊर्जावान उपायुक्त मनीष कुमार, जिन्होंने प्रोजेक्ट जागृति के तहत आयोजित जिला स्तरीय रक्तदान शिविर में 23वीं बार रक्तदान कर इंसानियत का नया अध्याय लिखा।

इस मौके पर पूरे कार्यक्रम स्थल पर भावनाओं का माहौल था। उपायुक्त जब कुर्सी पर बैठे और रक्तदान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उपस्थित सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। किसी ने कहा ऐसा डीसी शायद ही कहीं देखने को मिले!

कम उम्र में इतनी गहरी सामाजिक चेतना और सेवा भावना अपने आप में अद्वितीय है। मनीष कुमार न केवल प्रशासनिक कार्यों में दक्ष हैं, बल्कि इंसानियत के प्रतीक भी बन चुके हैं। उनकी आंखों में लोगों के लिए सच्ची चिंता और उनके शब्दों में समाज को आगे बढ़ाने की प्रेरणा झलकती है।

उन्होंने कहा रक्तदान सिर्फ एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक जीवन बचाने का संकल्प है।

वाकई, पाकुड़ जैसे जिले को ऐसा संवेदनशील, कर्मठ और मानवीय भावना से ओत-प्रोत उपायुक्त मिलना सौभाग्य की बात है। उनकी कार्यशैली ने यह साबित कर दिया है कि पद बड़ा नहीं, सेवा भावना बड़ी होती है।

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Author: Jharkhand Nama

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