
JHN DESK पाकुड़ (PAKUR) पाकुड़ सदर प्रखंड के कासीला चेक पोस्ट का हाल ऐसा है जैसे ऊपर से राम-नाम अंदर से माफिया धाम यह चेकपोस्ट नहीं, चुप्पी पोस्ट है साहब। माफिया ट्रैक्टर में ओवरलोड गिट्टी लेकर ऐसे सरकती है जैसे चेकपोस्ट के पहरेदार नींद की गोद में झूला झूल रहे हों!
नाम चेकपोस्ट और काम पासपोस्ट जो आए वो जाए, बिंदास जाए
दिन हो या रात ट्रैक्टर ऐसे रेंगते हैं जैसे मक्खन पर छुरी और मजिस्ट्रेट साहब खड़े हैं जैसे बिन घी की खिचड़ी में तड़का चालान वो तो यहाँ ऐसे गायब है जैसे गधे के सिर से सींग कानून? वो तो बस किताबों में सो रहा है और माफिया खुलेआम ठहाके लगा रहा है! डीसी मनीष कुमार ने कहा था अब सख्ती होगी लेकिन अफसरों ने तो बातों को ऐसे हवा में उड़ाया जैसे ताश का महल तूफान में!
कौन है वो स्टोन कंपनी जो बिना चालान पत्थर बेच रही
पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं करते पर यहां मगरमच्छ ही तैर रहे हैं और बाकी डरे हुए हैं माफिया बोले हमारा क्या चेकपोस्ट हमारा मौसेरा भाई है अब जनता देख रही है धूल उड़ रही है, ट्रैक्टर दौड़ रहा है और व्यवस्था औंधे मुंह पड़ी है!
अंत में सीधी बात बिना लाग-लपेट के
जब सियार को बनाओ बाग़ का चौकीदार तो अंगूर ही नहीं, पूरा बाग़ साफ़ हो जाता हैयहाँ गिट्टी नहीं, सिस्टम की ईंट से ईंट बज रही है,और चेकपोस्ट बस नाम का जैसे बरसात में छतरी में छेद!
यह पत्थरों का कारोबार नहीं ये व्यवस्था का चूना है, जहाँ माफिया बेलगाम और अफसर बेवजह गूंगे-बहरों’ का किरदार निभा रहे हैं!
Author: Jharkhand Nama
News portal



