
JHN DESK साहिबगंज (SAHIBGANJ) झारखंड में एक ऐसा इलाका है, जो मानो खुद को कानून से ऊपर मान चुका है नाम है कोटालपोखर! कहने को तो थाना है, चेकनाका है, पुलिस है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां रात होते ही कानून की आंखों पर पट्टी बंध जाती है और पत्थर माफिया की आंखें चमक उठती हैं।
बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया यह कहावत अगर कहीं सटीक बैठती है, तो वह है कोटालपोखर! यहां प्रशासनिक जिम्मेदारी कम और मुनाफे की मंडी ज्यादा नजर आती है। एक ओर राज्य सरकार राजस्व में इजाफे के लिए योजनाएं बना रही है, वहीं दूसरी ओर कोटालपोखर में सरकारी तिजोरी को रातोंरात चूना लगाया जा रहा है वह भी खुलेआम!
सूत्र बताते हैं कि हर रात 8 बजे के बाद यहां अवैध पत्थर तस्करी की महायात्रा शुरू होती है। बिना माइनिंग चालान के भारी वाहनों की आवाजाही आम हो चुकी है। जीवनपुर और रहीमटाड़ चेकनाका, जो कभी निगरानी के लिए बने थे, आज अवैध उगाही के गढ़ बन चुके हैं।
चौंकाने वाली बात तो ये है कि सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो कोटालपोखर थाना परिसर के भीतर पैसों के लेन-देन को उजागर कर चुके हैं। जनता जान रही है, मीडिया दिखा रही है, लेकिन प्रशासन…? जैसे करवाई शब्द को नींद आ गई हो।
स्थानीय लोग अब खुलकर कह रहे हैं, कोटालपोखर जितना छोटा नाम, उतना बड़ा काम। फर्क सिर्फ इतना है कि काम सरकारी नहीं, गैरकानूनी हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और प्रशासन इस ‘पत्थरकथा’ को खत्म करने की पहल करता है, या फिर रूपये के आगे सबको दिखाई देना बंद हो गया है ?
Author: Jharkhand Nama
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