चमचालाल, राजा के पास आया और उसने राजा के सामने झुककर कहा, “महाराज, आपके चरण तो इतने पवित्र हैं कि मैं इन्हें चाटकर ही धन्य हो जाऊंगा!”

तलवा चाटने वाली प्रजा की मजेदार कहानी मजेदार अंदाज में

“जो मेरी सबसे ज़्यादा तारीफ करेगा, उसे इनाम मिलेगा -राजा

चमचालाल, राजा के पास आया और उसने राजा के सामने झुककर कहा, “महाराज, आपके चरण तो इतने पवित्र हैं कि मैं इन्हें चाटकर ही धन्य हो जाऊंगा!”

एक बार की बात है, एक छोटे से राज्य में एक राजा था जिसका नाम था महाराज घमंडसिंह। राजा को सबसे ज़्यादा पसंद था जब उसकी प्रजा उसकी तारीफ करती और उसे खुश करने के लिए हर हद पार कर जाती। राजा का ये ऐलान था: “जो मेरी सबसे ज़्यादा तारीफ करेगा, उसे इनाम मिलेगा अब प्रजा में मुकाबला शुरू हो गया। हर कोई राजा को खुश करने के नए-नए तरीके निकाल रहा था। कोई कहता, “महाराज, आप तो सूरज से भी ज़्यादा चमकते हैं!” तो कोई कहता, “आपकी बुद्धि तो देवताओं को भी मात देती है!” लेकिन राजा का मूड कभी पूरी तरह सेट नहीं होता था एक दिन एक चापलूस, जिसका नाम था चमचालाल, राजा के पास आया। उसने सोचा, अगर राजा को खुश करना है तो कुछ ऐसा करना होगा जो किसी ने पहले कभी नहीं किया। उसने राजा के सामने झुककर कहा, “महाराज, आपके चरण तो इतने पवित्र हैं कि मैं इन्हें चाटकर ही धन्य हो जाऊंगा!” और वो सच में राजा के तलवे चाटने लगा राजा पहले तो हैरान हुआ, फिर खुश होकर ठहाके लगाने लगा। उसने कहा, “वाह! तुम तो सबसे बड़े भक्त निकले। तुम्हें मेरा खास मंत्री बनाता हूँ!” चमचालाल खुशी-खुशी मंत्री बन गया, और राजा के तलवे चाटने का काम उसने पूरे राज्य में फैला दिया। अब हर कोई राजा के तलवे चाटने की प्रैक्टिस करने लगा, ताकि वो भी चमचालाल की तरह इनाम पा सके लेकिन धीरे-धीरे राज्य का हाल खराब होने लगा। कोई काम नहीं कर रहा था, सिर्फ राजा को खुश करने में लगा हुआ था। राजा को ये बात समझ में आई कि चापलूसी से राज्य नहीं चलता उसने सबको फटकारा और कहा, “अब से कोई चापलूसी नहीं करेगा। काम करो, तभी इनाम मिलेगा!” और इस तरह तलवे चाटने वाली प्रजा की कहानी खत्म हुई।

Jharkhand Nama
Author: Jharkhand Nama

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