सच को जंजीरों में बाँधना आसान नहीं है-चाणक्य

सच एक ऐसी ताकत है जो चाहे कितनी भी कोशिश कर लो, जंजीरों में कैद नहीं की जा सकती। इसे दबाने की कोशिशें होती हैं, इसे झूठ के पर्दों में छिपाया जाता है, लेकिन सच की फितरत है कि वो हर बंधन तोड़कर बाहर आता ही है।सच को दबाने की कोशिशें और उनकी नाकामी की कई बार इतिहास गवाह रहा है कि सच को दबाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। झूठ का सहारा लेते हैं, डर और धमकी का इस्तेमाल करते हैं, या सच बोलने वालों को चुप कराने की साजिश रचते हैं। लेकिन सच हमेशा अपनी जगह बनाए रखता है।झूठ के ढेर पर खड़ा सच:* झूठ चाहे कितना भी बड़ा हो, वो सच को पूरी तरह नहीं मिटा सकता। झूठ की इमारत जितनी ऊँची होती है, सच की एक चिंगारी उसे गिराने के लिए काफी होती है। डर और धमकी का असर:* सच बोलने वालों को डराने की कोशिशें होती हैं, लेकिन उनका हौसला सच की ताकत से और मजबूत हो जाता है।*सच की आवाज़ को दबाना:* सच को दबाने के लिए लाखों कोशिशें की जाती हैं, लेकिन यह आवाज़ किसी न किसी कोने से गूँज उठती है। सच की ताकत सच की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसे कोई मिटा नहीं सकता। इसे जितना दबाने की कोशिश की जाती है, यह उतना ही उभरकर सामने आता है।सच का धैर्य:* सच को सामने आने में भले वक्त लग जाए, लेकिन जब यह सामने आता है, तो हर झूठ को ध्वस्त कर देता है। सच का साहस:* सच बोलने के लिए हिम्मत चाहिए, और यही हिम्मत इसे जंजीरों से आज़ाद कराती है। सच की अमरता:* झूठ समय के साथ मिट जाता है, लेकिन सच हमेशा के लिए जिंदा रहता है। इतिहास से सीखें चाणक्य ने कहा था, “सत्य ही ईश्वर है।” चाहे तानाशाह हों, चाहे अत्याचार, चाहे लाख बंदिशें—सच ने हमेशा अपना रास्ता बनाया। आजादी की लड़ाई हो, सामाजिक सुधार हो, या व्यक्तिगत संघर्ष—सच ने हर जगह अपनी ताकत दिखाई है।सच को जंजीरों में बाँधने की कोशिशें तो होती रहेंगी, लेकिन सच की फितरत ही आज़ादी है। इसे जितना दबाओगे, यह उतना ही जोर से उभरेगा। सच को बाँधने वाले खुद जंजीरों में फँस जाते हैं, लेकिन सच हमेशा आज़ाद रहता है।
Author: Jharkhand Nama
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