विस्थापितों की समस्याओं को लेकर अमड़ापाड़ा पहुंचे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी

झारखंड नामा संवाददाता रूपामुनी सोरेन अमड़ापाड़ा: सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी शुक्रवार को अमड़ापाड़ा पहुंचे। भाजपा कार्यालय के निकट मुख्य सड़क पर मंडल अध्यक्ष आशीष हेम्ब्रम, भाजपा जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू सहित पार्टी के विभिन्न वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए प्रतीक्षारत थे। बाबूलाल मरांडी का काफिला वहां पहुंचते ही रुका, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने फूल-माला पहनाकर उनका जोरदार अभिनंदन किया और उनके समर्थन में नारे लगाए।

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष पचुवाड़ा सेंट्रल एवं नॉर्थ कोल परियोजना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में विस्थापितों की समस्याओं का जायजा लेने निकल पड़े। उन्होंने नॉर्थ एवं सेंट्रल कोल परियोजना के चिलगो, बिशनपुर, कठालडीह सहित अन्य गांवों का दौरा किया।
चिलगो गांव में उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए निर्मित आवासों का निरीक्षण किया। यहां 118 विस्थापित परिवारों को शिफ्ट किए गए कॉलोनी का अवलोकन कर वहां रह रहे लोगों की स्थिति और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
विस्थापितों ने नेता प्रतिपक्ष को बताया कि उनकी जमीनें सरकार अथवा कंपनी द्वारा अधिग्रहित कर ली गई हैं, जिससे उनकी विरासत और रोजी-रोटी का स्थायी जरिया समाप्त हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार उनकी जमीनें अब कोयला खदानों में तब्दील हो चुकी हैं, लेकिन रोजगार के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि कंपनी की ओर से उन्हें नियमित रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया है।
ग्रामीणों ने आवासों की गुणवत्ता और जगह की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि संयुक्त परिवारों के लिए मौजूदा मकान पर्याप्त नहीं हैं। प्रति परिवार मकान के लिए सात डिसमिल जमीन दी गई है। विस्थापितों ने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षण संस्थान की व्यवस्था नहीं होने की भी शिकायत की। उन्होंने कहा कि खनन कार्य शुरू हुए छह-सात वर्ष बीत जाने के बावजूद शिक्षा सहित कई बुनियादी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है।
विस्थापितों ने भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान मकान एक-दो पीढ़ियों के बाद परिवार के बढ़ते सदस्यों के लिए पर्याप्त नहीं रहेंगे। अभी छोटे और नाबालिग बच्चे परिवार के साथ रह रहे हैं, लेकिन उनके बड़े होकर विवाह के बाद परिवार के विस्तार की स्थिति में रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी। ऐसी कई आधारभूत समस्याओं से ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने विस्थापितों की समस्याओं और उनके दर्द को निकट से समझने के बाद कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास की योजना बनाते समय सरकार को आने वाली कम से कम चार पीढ़ियों के भविष्य की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही विस्थापितों के साथ वास्तविक न्याय किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में आदिवासी आबादी पहले से ही घट रही है। यदि लोगों के पास रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होंगी तो उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वह विस्थापितों की समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से रखेंगे और जरूरत पड़ने पर उनके हक व अधिकार के लिए भाजपा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगी।
Author: Jharkhand Nama
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