ओपन स्काई स्मार्ट स्कूल पाकुड़ के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण एवं वनभोज हेतू भोगनडीह हुआ रवाना

ओपन स्काई स्मार्ट स्कूल पाकुड़ के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण एवं वनभोज हेतू भोगनडीह हुआ रवाना

झारखंड नामा ब्यूरो पाकुड़/ ओपन स्काई स्मार्ट स्कूल, पाकुड़ के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण एवं वनभोज हेतू भोगनडीह ले जाया गया भोगनाडीह प्रकृति की गोद में बसा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व का एक दर्शनीय स्थल है। बच्चों को भोगनाडीह के महत्व के बारे में समझाते हुए शिक्षकों ने बताया कि भोगनाडीह हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी सिदो कान्हू की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि है| हालांकि भारतीय इतिहास की ज्यादातर पुस्तकों में आजादी की पहली लड़ाई के तौर पर 1857 के संग्राम का उल्लेख किया गया है, लेकिन शोधकर्ताओं और जनजातीय इतिहास के विद्वानों का एक बड़ा समूह 30 जून 1855 को झारखंड के एक छोटे से गांव भोगनाडीह से शुरू हुए ‘हूल’ को देश का प्रथम स्वतंत्रता जनक्रांति मानता है। इस जनक्रांति के नायक सिदो कान्हू थे, जो मौजूदा झारखंड के साहिबगंज जिला अंतर्गत बरहेट प्रखंड के भोगनाडीह गांव निवासी चुन्नी मुर्मू की संतान थे. उन्होंने अंग्रेजों और जमींदारों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ 30 जून 1855 को भोगनाडीह में विशाल जनसभा बुलाई थी, जिसमें लगभग 20 हजार संताल आदिवासी इकट्ठा हुए थे। हर वर्ष इस दिन को हुल दिवस के रूप में मनाया जाता है। बच्चों ने सिदो कान्हू की याद में बनाये गये सिदो कान्हू पार्क के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद लिया तथा पार्क में स्थित सिदो कान्हू एवं चांद भैरव की प्रतिमा का दर्शन किया। साथ ही बच्चों ने अंतराक्षरी, बेडमिंटन, क्रिकेट आदि कई खेल खेले तथा स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाया। बच्चों ने आसपास स्थित धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों जैसे शिवगादी आदि का भी दर्शन किया। विद्यालय के निदेशक मनोज भगत ने बताया कि शैक्षणिक भ्रमण एवं वनभोज बच्चों में पढ़ाई के तनाव को कम करने में मदद करता है। बच्चों को प्रकृति का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है प्रकृति को पास से जानने समझने का अवसर मिलता है। यह बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारिक ज्ञान को बढ़ाने में सहायक है।

Jharkhand Nama
Author: Jharkhand Nama

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