दलाल अभी तक कार्यालय मे हावी है साहब

वसी साहब इन आर्टिकल को अच्छे से पठन पाठन के पश्चात मेरे नाम से कोई नोटिस निर्गत करें आप बड़े काबिल और होनहार है साहब कुर्सी का ख्याल रखे 

किसी छूट भैया आंदोलन कारी और तथाकथित डीड राइटर के बातों पर असंवेधानिक आदेश ना करें 

 

JHN PAKUR अमित दास :SPT (Santhal Parganas Tenancy) Act, 1949 की धारा 42 की बात  ये तो आदिवासी भूमि और उनके अधिकारों से जुड़ा एक सख्त कानून है। इस धारा के तहत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को बेचना, ट्रांसफर करना गैर कानूनी है

एसपीटी एक्ट 1949 की धारा 20 ये धारा भी आदिवासी भूमि और उनके अधिकारों को संरक्षित करने के लिए बनाई गई है। धारा 20 के तहत, आदिवासी भूमि का उपयोग केवल खेती-बाड़ी और उनके पारंपरिक उपयोगों के लिए किया जा सकता है। मतलब, इस भूमि का गैर-कृषि या व्यावसायिक उपयोग करना सख्त मना है, जब तक सरकार से विशेष अनुमति न हो

एसपीटी एक्ट के तहत “रैयत” यानी ज़मीन का वैध मालिक या जो उस ज़मीन पर खेती करता है, वही इस ज़मीन से जुड़े किसी विवाद या अधिकार की मांग कर सकता है। अगर कोई रैयत नहीं है, मतलब उसका उस ज़मीन पर कोई कानूनी हक़ नहीं है, तो वो “उछेदी वाद” (कानूनी दावा) नहीं कर सकता।

इसका मतलब साफ है—गैर-आदिवासी या कोई बाहरी व्यक्ति जो उस ज़मीन का रैयत नहीं है, वो ज़मीन से जुड़े किसी विवाद में कानूनी तौर पर दखल नहीं दे सकता। ये कानून आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है, ताकि उनकी ज़मीन पर बाहरी लोग कब्ज़ा न कर सकें या कोई गड़बड़ी न कर पाए।

लेकिन असल में, माफिया और भ्रष्ट लोग यहां भी खेल कर जाते हैं। फर्जी कागज़ बनवाकर या सेटिंग-गेटिंग के दम पर कई बार उछेदी वाद कर देते हैं, और फिर असली रैयत को परेशान करते है

 

शिकायत कर्ता अभिजीत दास के पिता स्वर्गीय उत्तम कुमार दास है जिनके पिता सुधीर दास ने वर्ष 1959 मे जमीन बेचीं थी पर न्यायालय ने उनके विरुद्ध कारवाई नहीं कर इंटेर्वेनर सह रैयत बीट को उत्तराधिकार मान चूका है  जो हिन्दू उत्तराधिकार 1956के तहत नहीं आता है

 

भू माफिया साहा के विरुद्ध 2019मे कांड अंकित है जो अभी दलाल बना हुआ है

Jharkhand Nama
Author: Jharkhand Nama

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